झारखण्ड मंत्रिपरिषद ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के निधन पर पारित किया शोक प्रस्ताव

 

पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न, श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर झारखण्ड सहित समस्त देशवासी अपार कष्ट का अनुभव कर रहे हैं। झारखण्ड राज्य के जनक श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर झारखण्ड की सवा तीन करोड़ जनता की ओर से राज्य मंत्रिपरिषद गहरा शोक प्रकट करती है।

25 दिसम्बर, 1924 को ग्वालियर मध्यप्रदेश में अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ था। इनकी माता श्रीमती कृष्णा देवी और पिता श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी थे। ग्वालियर और कानपुर में शिक्षा के बाद कुछ समय तक पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े रहे तथा राष्ट्रधर्म, पांचजन्य, वीर अर्जुन के संपादकीय दायित्वों का भी निर्वहन किया। आर्यसमाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क से राष्ट्रवादी चिन्तन को अपना कर राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वो राष्ट्रीय आन्दोलन में अपने चिन्तन और साहित्य के माध्यम से और सक्रिय सेनानी की तरह जुड़े। भारत के विभाजन से अपार कष्ट में उनकी रचना ‘अजादी अभी अधूरी है’ देशभर में लोकप्रिय हुई।

स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी दस बार लोकसभा तथा दो बार राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए। आपातकाल के पुरजोर विरोध में वो देश के लोकप्रिय नेता बन कर उभरे। स्वर्गीय वाजपेयी का सम्मान सभी राजनीतिक दलों सभी सामाजिक संगठनों में था। मन,वचन और कर्म से वह देश के आजातशत्रु के रूप में विख्यात हुए। भय, भूख, निरक्षरता और अभाव से मुक्त भारत की परिकल्पना उन्होंने की थी, जो उनके राजनीतिक जीवन और साहित्यिक चेतना में दिखाई देता है। नेता विरोधी दल के रूप में उन्होंने भारत का नेतृत्व कर विश्व पटल पर भारत का पक्ष रखा। विदेश मंत्री तथा कालांतर में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने विश्व के सामने विश्वबंधुत्व परस्पर समानता और विश्व शांति का पक्ष रखा।

सफल परमाणु परीक्षणों तथा कारगिल युद्ध के समय प्रदर्शित उनकी दृढ़ संकल्प शक्ति ने पूरी दुनिया में भारत को अग्रीणी राष्ट्रों की पंक्ति में शामिल किया। वो भारत के पड़ोसी देशों के साथ मधुर और शान्तिपूर्ण संबंधों को बनाए रखने के प्रयासों में निरंतर लगे रहे तथा सदैव भार के हितों को सर्वोपरि रखा। इस दिशा में लाहौर बस यात्रा और आगरा शिखर सम्मेलन प्रमुख मील के पत्थर हैं।

प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल तेजी से प्रगति और विकास के नए-नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए सदैव याद किया जाएगा। स्वर्णिम चतुर्भुज राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, टेलीकॉम सम्पर्कता, आईटी तथा ऊर्जा सेक्टर में योजनाओं का सफल प्रारम्भ उनकी कुछ उल्लेखनीय पहलें थीं।

संसदीय परम्पराओं का जीवन भर पालन कर उन्होंने भारत के संसदीय लोकतंत्र को नए आयामों के साथ समृद्ध किया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने उनमें भारत का भविष्य देखा था। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए यह कहा था कि एक दिन वे भारत का नेतृत्व करेंगे। डॉ. राम मनोहर लोहिया उनके हिन्दी प्रेम के प्रशंसक थे। पूर्व प्रधानमंत्री श्री चन्द्रशेखर उन्हें संसद में ‘गुरूदेव’ कहकर संबोधित करते थे। उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

झारखण्ड उनका सदैव ऋणी रहेगा। 15 नवम्बर, 2000 में झारखण्ड राज्य का गठन उन्हीं की देन थी। झारखण्ड राज्य के सृजनकर्ता स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी का झारखण्ड से काफी पुराना एवं गहरा रिश्ता रहा है। कई महत्वपूर्ण मौकों पर वो झारखण्ड आए और यहां के लोगों के बीच अपनी अमिट छाप छोड़ी है। जनजातीय समाज को लेकर अटल जी हमेशा संवेदनशील रहे और उनके प्रधानमंत्री काल में ही भारत सरकार में एक पृथक जनजातीय मंत्रालय का गठन किया गया था। संविधान के 8वीं अनुसूची में संथाल भाषा को सम्मिलित करने का श्रेय भी श्रद्धेय वाजपेयी जी को जाता है, जिसके लिए समस्त झारखण्डवासी उनके ऋणी हैं।

उनके निधन से न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया से एक दूरदर्शी, परिपक्व, संवेदनशील, विशाल हृदयी और दृढ़ संकल्प वाला नेता चला गया। उनके दिखाए रास्ते पर चलकर भारत को एक महान राष्ट्र बनाने के उनके संकल्प को पूरा करने में हम सहभागी बनेंगे। झारखण्ड मंत्रिमंडल स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के दुःखद निधन पर गहरा शोक प्रकट करता है तथा शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी तथा सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य की ओर से हार्दिक संवेदनाएं अभिव्यक्त करता है।