झारखंड में कुपोषण को समाप्त करना सरकार का लक्ष्य: मुख्यमंत्री

 

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड में कुपोषण बड़ी समस्या है। इसे समाप्त करना हमारी सरकार का एकमात्र लक्ष्य है। इसके लिए सरकार को खजाने की चिंता नहीं है। हमारी आने वाली पीढ़ी स्वस्थ हो, तभी हमारा राज्य भी समृद्धशाली बन सकेगा। उक्त बातें उन्होंने डीआरडीओ के डिफेंस फूड रिसर्च लैब (डीएफआरएल) और सीएफटीआरआई के अधिकारियों को कही। वे रेडी टू इट योजना के बारे में चर्चा कर रहे थे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएफआरएल सखी मंडल को मशीन, प्रशिक्षण आदि दें। सखी मंडल के माध्यम से आंगनबाड़ी में बच्चों तथा गांव की गरीब महिलाओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध करायेगी। क्वॉलिटी में किसी प्रकार की कमी न हो, बच्चों और महिलाओं को संपूर्ण आहार मिले, इसकी देखरेख मुख्यमंत्री उद्यमी बोर्ड के जिम्मे होगा। हर दो जिले में एक मशीन रहेगी, जहां आहार तैयार होगा। महिला समूह इन्हें ट्रांसपोर्ट कर आंगनबाड़ी तक पहुंचायेगी। इनके लिए मुद्रा लोन या स्टैंडअप इंडिया के माध्यम से लोन की सुविधा मुहैया करायी जायेगी। इससे बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा। राज्य से कुपोषण और रोजगार की समस्या का समाधान हो सकेगा। राज्य में मुख्य रूप से आयरन, प्रोटीन और वसा की कमी से कुपोषण है। जो आहार तैयार होंगे, उनमें इनकी मात्रा समूचित रहे, इसका ध्यान रखें। सप्ताह में सात दिन अलग-अलग आहार रहे, ताकि बच्चों की रूचि बरकरार रहे। बच्चों को चॉकलेट काफी पसंद आती है, इसलिए ऐसी चॉकलेट तैयार करायें, जो प्रोटीन से भरपूर हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में बड़ी संख्या में वनोपज होते हैं। हमारे यहां टमाटर, इमली, मटर आदि भी काफी होते हैं। डीएफआरएल द्वारा तैयार विभिन्न तरह की मशीनों को सरकार सखी मंडलों को उपलब्ध कराकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ेगी। छोटी-छोटी इकाईयां बनाकर लोग टमाटर कैचप, जैम आदि तैयार कर स्थानीय बाजार में बेच सकेंगे। इसके लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की जरूरत नहीं होगी। इससे स्वदेशी को भी बढ़ावा मिलेगा। झारखंड का पैसा बाहर नहीं जायेगा। लोगों को ताजे उत्पाद मिलेंगे।

बैठक में सीएफटीआरआई ने पौष्टिक आहार तैयार करने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि राज्य के अधिकारी और डीएफआरएल और सीएफटीआरआई के अधिकारी 10 दिन में खाका तैयार कर लें। अप्रैल से जमीन पर काम शुरू कर दिया जायेगा। आंगनबाड़ी सेविकाओं को मां की भूमिका में रहना होगा, तभी बच्चों को अच्छे संस्कार मिल सकेंगे। कुछ आंगनबाड़ी सेविकाओं को मास्टर ट्रेनर बनाया जायेगा, ताकि वे दूसरी सेविकाओं को प्रशिक्षित कर सकें। बैठक में मुख्य सचिव श्री सुधीर त्रिपाठी, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री सुखदेव सिंह, ग्रामीण विभाग प्रधान सचिव श्री अविनाश कुमार, उद्योग सचिव श्री सुनील कुमार बर्णवाल, समाज कल्याण सचिव श्री विनय चौबे, पोषण मिशन के महानिदेशक श्री डीके सक्सेना, डीएफआरएल के निदेशक डॉ राकेश कुमार शर्मा, वैज्ञानिक डॉ केआर अनिल कुमार, सीएफटीआरआई के अधिकारी समेत अन्य लोग उपस्थित थे।