महिला और युवाओं के हाथ में दें निर्णय की शक्ति- रघुवर दास

 

रांची – प्रोजेक्ट भवन में शुक्रवार को मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने पंचायती राज विभाग के समन्वयकों के साथ समीक्षा बैठक की।  बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे राज्य भर से आये समन्वयकों ने अपने विचार साझा किये। इस दौरान मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि असली झारखंड गांवों में बसता है, जब तक वहां की दशा नहीं सुधरेगी, झारखंड नहीं बदलेगा।
“समाज के शोषितों के जीवन में जो बदलाव आना चाहिए था वो अब तक नहीं आया है, इसलिए हमने झारखण्ड का बजट गांव के गरीबों के लिए बनाया है।”

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि आरा केरम गांव से सीख लेकर मेरे मन में विचार आया कि हम योजनाओं को बनाने का हक सीधे गांव के लोगों को ही दे दें। उन्होंने समन्वयकों को नसीहत दी कि वो गांववालों को प्रेरित करें और एक हफ्ते या 10 दिन में हर कोऑर्डिनेटर ब्लॉक लेवल पर बैठक करें। मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने राज्य के प्रखंड समन्वयकों को निर्देश दिया कि वो मार्च तक आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समिति का गठन पूर्ण कर लें। अप्रैल से योजनाओं को लागू करने का काम शुरू कर दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि समिति में 9 से 11 सदस्य होंगे। महिला को अध्यक्ष और युवा को सचिव का पद के लिए गांव वाले ही चयन करेंगे। सरकार गांव के विकास की छोटी-छोटी योजनाओं हेतु राशि सीधे समिति के खाते में भेजेगी। उन्होंने कहा कि अब गांववाले ही तय करेंगे कि उन्हें क्या चाहिए।
झारखण्ड की महिलाएं बहुत मेहनती है, इन्हें हमें विकास से जोड़ना है, उनके हाथों में शक्ति लानी है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि गांव के फैसलों में निर्णायक भूमिका निभाने में महिलाओं और युवाओं के आने से महिला सशक्तिकरण और युवा सोच को बल मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे राज्य में बारिश तो बहुत होती है, लेकिन हम उसका पानी इस्तेमाल नहीं करते। गांवों की बैठक में ये तय करें कि आपको पोखरा बनाना है, चेक डैम बनाना है या उस पानी का कैसे इस्तेमाल करना है। 5 लाख तक की स्कीम हम सीधा विकास समिति को देंगे। विकास कार्यों के लिए 80% पैसा सरकार देगी, 20% श्रमदान करके लेबर कॉस्ट के ज़रिए इसे पूरा कर सकते हैं।
“जिस माटी में जन्म लिया है, उसका कर्ज अपने इलाके में विकास कार्य कर के चुकाएं। आप सभी हर गांव में विकास के लिए आम सभा करें। हर हाल में ग्राम विकास समिति या आदिवासी विकास समिति का अध्यक्ष महिला को ही बनाएं, और नौजवान बने सचिव। मानकी मुंडा और वरिष्ठ आदिवासी को सदस्य ज़रूर रखें। समिति से राजनीति को बिल्कुल दूर रखें, नहीं तो उठापटक होती रहेगी।”

बैठक में मुख्य सचिव श्रीमती राजबाला वर्मा, विकास आयुक्त श्री अमित खरे, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री सुनील कुमार बर्णवाल, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री अविनाश कुमार, पंचायती राज विभाग के सचिव श्री विनय चौबे समेत विभाग के अधिकारी और प्रखंड समन्वयक उपस्थित रहे।