मुख्यमंत्री ने पेश किया जनता का बजट

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए राज्य का बजट पेश कर दिया है । मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने बतौर वित्त मंत्री सदन में बजट भाषण पढ़ा । बजट भाषण की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने नेता जी सुभाषचंद्र बोस को उनकी जयंती पर नमन कर किया ।

कुल 80,200 करोड़ रुपये के बजट में से राजस्व व्यय के लिए 62,744.44 करोड़ रुपये तथा पूंजीगत व्यय के लिए 17,455.56 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है । प्रस्तावित कुल बजटीय उपबंध से सर्वाधिक व्यय 11,771.16 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज प्रक्षेत्र को आबंटित किया गया  जो कि चालू वर्ष की तुलना में 12.39 प्रतिशत अधिक है । बजट के बाद मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने विधानसभा परिसर में ही प्रेस वार्ता को भी संबोधित किया ।

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि ये न्यू झारखण्ड का है और ये राज्य की सुधरती आर्थिक स्थिति का प्रतिबिंब है । मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार जनता से किए वादे पूरे करने की कोशिश कर रही है । मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि जिस उद्देश्य के साथ श्रद्धेय अटल जी ने झारखण्ड की स्थापना की हम उस उद्देश्य को पूरा कर रहे हैं ।

बजट 2018-19 के बजट से जुड़े अहम कुछ बिंदु

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* मुख्यमंत्री जी का पूरा बजट भाषण

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के पावन अवसर पर झारखण्ड विधानसभा में बजट पेश किया गया। मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास जी का बजट भाषण आप भी पढ़िए ।   

आज नेता जी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन है। ‘‘जय हिन्द’’ का नारा नेताजी ने देश को दिया था। इस नारे में बड़ी प्ररेणा है, सबको जोड़ने की शक्ति है। आजाद हिन्द सेना स्वाधीनता की प्राप्ति के लिए, जिसका गठन नेता जी ने किया था, इसी नारे को लगाते हुए आगे बढ़ी थी, युद्ध में उतरी थी । आज यह नारा सारे भारत का नारा बन गया है। नेताजी का व्यक्तित्व अनूठा था। उस जमाने में उन्होंने देश के आर्थिक विकास के लिए प्लानिंग पर विचार करने के लिए एक कमेटी का गठन किया था। आज नियोजन की बात सभी करते हैं। नियोजन के बिना विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। लेकिन उस जमाने में जब हम पराधीन थे, जब स्वाधीनता की लड़ाई पूरी तरह जीती जानी बाकी थी, नेताजी ने कांग्रेस अध्यक्ष के नाते एक प्लानिंग कमिटी बनाई और कहा कि जब हम आजाद होंगे तो हिन्दुस्तान का नक्शा किस तरह का होगा, हिन्दुस्तान का विकास किस तरह होगा, इसकी अभी से तैयारी करनी चाहिए, इसकी अभी से योजना बनानी चाहिए। यह बात नेता जी की दूरदर्शिता को दर्शाती है।

मैं आज उनके जन्म दिन के अवसर पर नेता जी सुभाष चन्द्र बोस को शत्-शत् नमन करता हूं तथा इस पुनीत दिन पर राज्य के विकास की रूपरेखा सदन के समक्ष प्रस्तुत करते हुए, अपने आप को सौभाग्यशाली समझता हूं । नेता जी के रास्ते पर चल कर हमें राजनीतिक आजादी को आर्थिक और सामाजिक न्याय मे बदलना है।

इस पुनीत अवसर पर मैं राज्य के अमर वीरों बिरसा मुण्डा, सिद्धो-कान्हू, चांद, भैरव, वीर बुद्धु भगत, तिलका मांझी, नीलाम्बर-पीताम्बर, तेलंगा खड़िया, जतरा टाना भगत, पाण्डेय गणपत राय, ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव, शेख भिखारी जी के साथ झारखण्ड के सभी अमर शहीदों को सादर नमन करता हूँ। मैं इस प्रबुद्ध सदन के प्रति तथा गौरवशाली झारखण्ड की जनता के प्रति भी हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं ।
 
महोदय, परम श्रद्धेय भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कहा था कि ‘‘समता के साथ ममता, अधिकार के साथ आत्मीयता, वैभव के साथ सादगी-नवनिर्माण के प्राचीन आधार स्तम्भ हैं। इन्हीं स्तम्भों पर हमें भावी भारत का भवन खड़ा करना है।’’

पिछले तीन वर्षों से हमारी सरकार ने यह निश्चय कर रखा है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े सबसे गरीब व्यक्ति तक विकास कार्यों का लाभ पहुंचे।

आदरणीय प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में झारखण्ड विकास के पथ पर लगातार आगे बढ़ रहा है तथा उनके मार्गदर्शन में हम न्यू झारखण्ड बनाने के लिये कृत संकल्प है। योजना बनाओ अभियान, जनसंवाद, बजट पूर्व संगोष्ठियां, सखी मण्डलों का सुदृढ़ीकरण, 20सूत्री समितियों का पुनर्गठन, पंचायत सचिवालयों का गठन, वार्ड विकास समिति का गठन आदि कुछ ऐसे प्रयास हमने प्रारंभ किए हैं, जिससे जन-जन की आवाज सुनी जा सके और जन आंकाक्षाओं के अनुरूप हम अपने सरकार का कार्य सुगठित कर सकें।

इसी क्रम में डोभा निर्माण, दो दुधारू गायों की योजना, कृषि सिंगल विण्डो, कौशल विकास कार्यक्रम, जन-वन योजना, जन-धन योजना, मुद्रा योजना, प्रज्ञा केन्द्रों का सुदृढ़ीकरण, आदि कार्यक्रमों के माध्यम से हम सरकार को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। महोदय, प्रयास से ही सफलता मिलती है।

महोदय, मेरा सदैव यह प्रयास रहा है कि बजट एवं योजना निर्माण का काम वित्तीय वर्ष प्रारंभ होने के काफी पूर्व तैयार हो जाना चाहिए, ताकि वित्तीय वर्ष प्रारंभ होने के साथ ही धरातल पर वास्तविक कार्यान्वयन प्रारंभ किया जा सके। इसी क्रम में हमने वर्ष 2016-17 में फरवरी के अन्तिम सप्ताह में तथा वित्तीय वर्ष 2017-18 में 23 जनवरी को बजट पेश किया था, इस वर्ष भी 23 जनवरी को ही बजट प्रस्तुत कर रहा हूं।  

अध्यक्ष महोदय, आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट की विशेषताओं का उल्लेख करने के पूर्व मैं यह कहना चाहूँगा कि विगत बजट भाषण में मेरे द्वारा की गईं कुल 142 घोषणाओं में 121 पूर्ण हो चुकी हैं तथा शेष 21 के कार्यान्वयन की प्रक्रिया चल रही है। यह राज्य की जनता के प्रति हमारी सरकार के उत्तरदायित्व बोध का द्योतक है।

गत वर्ष किए गए घोषणाओं पर कृत कार्रवाई प्रतिवेदन अलग से विधान सभा के पटल पर रखा गया है। इनमें से कुछ एक निम्नवत है-

विगत 2 वर्षों में राज्य सरकार द्वारा एक लाख से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं एवं 50 हजार और नियुक्तियां जून, 2018 तक की जायेंगी। स्थानीय नीति की घोषणा होने के कारण इन नियुक्तियों में 95 प्रतिशत से अधिक स्थानीय उम्मीदवार की ही नियुक्ति की गई है।

झारखण्ड आन्दोलन के पुरोधा विनोद बिहारी महतो की स्मृति में ‘‘विनोद बिहारी महतो विश्वविद्यालय’’ की स्थापना धनबाद में नवम्बर, 2017 में की गई है।

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के अन्तर्गत झारखण्ड के 68 लाख परिवारों में से 57 लाख गरीब परिवारों का प्रति परिवार दो लाख रुपये का बीमा होगा, जिसमें एक-दो नहीं, बल्कि 980 छोटी-बड़ी बीमारियाँ कवर होंगी।

108 एम्बुलेंस सेवा प्रारंभ की गई है, जो चौबीसों घण्टे आपात परिस्थियों के लिए 108 कॉल सेन्टर से संचालित है।
वर्ष 2014 तक 38,904 विद्यालयों में से मात्र 7,000 विद्यालयों में बेंच एवं डेस्क की व्यवस्था उपलब्ध थी, जिसे बढ़ाकर अब 31,705 विद्यालयों में बेंच एवं डेस्क उपलब्ध करायी गई है।

वर्ष 2014 तक 38,904 विद्यालयों में से मात्र 3,500 विद्यालयों में बिजली की सुविधा उपलब्ध थी, जिसे बढ़ाकर 26,788 विद्यालयों में बिजली की सुविधा उपलब्ध करायी गई है।

वर्ष 2014 तक 22,636 विद्यालयों में शौचालय की व्यवस्था उपलब्ध थी जिसे बढ़ाकर सभी 38,904 विद्यालयों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध करायी गई है।

वर्ष 2014 तक 30,803 विद्यालयों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध थी, जिसे बढ़ाकर 38,132 विद्यालयों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध करायी गई है।

वर्ष 2014 तक कुल 2,932 ग्राम अविद्युतीकृत थे, दिनांक 31 दिसम्बर, 2017 तक इन सभी ग्रामों को विद्युतीकृत किया जा चुका है।

वर्ष 2014 में सिर्फ 38 लाख घरों में बिजली थी और 30 लाख से अधिक घरों में अंधेरा था। विगत् तीन वर्ष में 8 लाख घरों में बिजली पहुँचा दी गई है और वर्ष 2018 की दीपावली तक शेष सभी घरों में बिजली पहुंचा दी जायेगी।
झारखण्ड राज्य बनने के समय से 2015 तक राज्य में मात्र 3 चिकित्सा महाविद्यालय कार्यरत थे। गत दो वर्षो में पलामू हजारीबाग एवं दुमका में नए चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त तीन चिकित्सा महाविद्यालयों से सबद्ध 500 शय्यावाले अस्पतालों की स्वीकृति कुल 1,475.02 करोड़ रुपये की लागत पर दी गई है।

शहीद ग्राम विकास योजना राज्य में पहली बार प्रारंभ की गई है, जिसके अन्तर्गत राज्य के वीर सपूतों के जन्मभूमि के समग्र विकास हेतु कार्य किया जा रहा है।

विश्व बैंक सम्पोषित 500 करोड़ की लागत से ‘‘तेजस्विनी योजना’’ तथा 1,500 करोड़ रुपये की लागत से ‘‘जोहार परियोजना’’ की शुरूआत की गई है।

राज्य में लघु एवं कुटीर उद्योगों के विकास एवं रोजगार सृजन निमित्त मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड का गठन किया गया है।
नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण किया गया है।

महोदय, हमने शासन को पारदर्शी तथा जनता के सरोकार को सर्वोपरि बनाए रखने का प्रयास किया है। गत वित्तीय वर्ष की भांति इस वर्ष के बजट के निर्माण के क्रम में हमने राज्य के प्रत्येक प्रमण्डल में जाकर समाज के प्रमुख वर्गो से उनकी आवश्यकताओं और अपेक्षाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की और उन्हें इस साल के बजट में समावेशित करने का प्रयास भी किया है। इस प्रयास में मैंने राज्य 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के मानिन्द सदस्यों तथा स्टेकहोल्डर्स की बैठकें भी की हैं, जिसमें आम जनों के साथ राज्य के माननीय मंत्रियों, माननीय सांसदों, माननीय विधायकों तथा प्रबुद्ध अर्थशास्त्रियों के भी सुझाव प्राप्त किये है एवं उन्हें समावेशित किया है। ऐसा करने का उद्देश्य यह है कि आम जनता राज्य की बजट को अपना बजट समझे, कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में वे भी पर्यवेक्षकीय भूमिकाएं अदा करें और उन्हें भी अपनी जवाबदेही का एहसास रहे।

इन समग्र सफल आयोजनों के लिए मैं राज्य की प्रबुद्ध जनता तथा सचेत प्रशासनिक तंत्र को साधुवाद देता हूं । मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि मेरी सरकार की यह अभिनव और अनोखी पहल आगामी वर्षों में और सघन होगी। मेरा विश्वास है कि राज्य के सर्वांगीण विकास में इसके परिणाम न केवल दूरगामी अपितु अतुलनीय होगें।
 
महोदय, आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए मैं सदन के सामने राज्य का सकल बजट रुपये 80,200 करोड़ रुपये का अनुमान प्रस्तुत कर रहा हूं,जिसमें राजस्व व्यय के लिए 62,744.44 करोड़ रुपये तथा पूंजीगत व्यय के लिए 17,455.56 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है ।
 
अध्यक्ष महोदय, बजट में प्रावधानित सकल राशि को यदि प्रक्षेत्र के दृष्टिकोण से देखा जायेगा तो सामान्य प्रक्षेत्र के लिए 22,689.70 करोड़ रुपये सामाजिक प्रक्षेत्र के लिए 26,972.30 करोड़ रुपये तथा आर्थिक प्रक्षेत्र के लिए 30,538 करोड़ रुपये उपबंधित किए गए है।

अध्यक्ष महोदय, बजट में प्रावधानित राशि के लिए निधि की व्यवस्था पर मैं सदन का ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा। राज्य को अपने कर-राजस्व से करीब 19,250 करोड़ रुपये तथा गैर कर-राजस्व से 9,030 करोड़ रुपये केन्द्रीय सहायता से करीब 13,850 करोड़ रुपये केन्द्रीय करों में राज्यांश से 27,000 करोड़ रुपये लोक ऋण से करीब 11,000 करोड़ रुपये तथा उधार एवं अग्रिम की वसूली से करीब 70 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।

अध्यक्ष महोदय, अब मैं संक्षेप में सदन को राज्य की आर्थिक स्थिति से अवगत कराना चाहूंगा। वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रचलित मूल्य के आधार पर झारखण्ड राज्य का सकल घरेलू उत्पाद GSDP 3,08,785 करोड़ रुपये आकलित किया गया है । यह वर्ष 2017-18 के 2,79,452 करोड़ रुपये की तुलना में 10.50 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है। स्थिर मूल्य पर राज्य का GSDP वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 2,43,032 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो कि पिछले वित्तीय वर्ष के 2,27,066 करोड़ रुपये की तुलना में 7.03 प्रतिशत अधिक है ।
 
अध्यक्ष महोदय, राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में वित्तीय वर्ष 2017-18 में कृषि एवं सम्बद्ध प्रक्षेत्रों का योगदान 14.97 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वर्त्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय 70,468 रुपये होने का आकलन है, जो वित्तीय वर्ष 2016-17 में 64,823 रुपये था।
आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा 7,494.45 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो कि आगामी वित्तीय वर्ष के अनुमानित ळैक्च् का 2.43 प्रतिशत है।

महोदय, वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए प्रस्तावित कुल बजटीय उपबंध 80,200 करोड़ रुपये में से सर्वाधिक व्यय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज प्रक्षेत्र में 11,771.16 करोड़ रुपये प्रस्तावित है, जो चालू वर्ष की तुलना में 12.39 प्रतिशत की दर से 1,297.46 करोड़ रुपये अधिक है। इसी प्रकार, शिक्षा प्रक्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2018-19 में 11,181.49 करोड़ रुपये प्रस्तावित है, जो चालू वर्ष की तुलना में 6.31 प्रतिशत की दर से 663.85 करोड़ रुपये अधिक है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में कृषि एवं जल संसाधन प्रक्षेत्र के लिए 6,421.64 करोड़ रुपये का बजट उपबंध प्रस्तावित है, जो चालू वर्ष की तुलना में 14.86 प्रतिशत की दर से 830.72 करोड़ रुपये अधिक है ।

महोदय, स्वास्थ्य प्रक्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 3,826.07 करोड़ रुपये का बजट उपबंध प्रस्तावित है, जो चालू वर्ष की तुलना में 23.18 प्रतिशत की दर से 720.10 करोड़ रुपये अधिक है। इसी प्रकार, वित्तीय वर्ष 2018-19 में नगर विकास एवं पेयजल तथा स्वच्छता प्रक्षेत्र के लिए 5,357.70 करोड़ रुपये का बजट उपबंध प्रस्तावित है, जो चालू वर्ष की तुलना में 17.70 प्रतिशत की दर से 805.88 करोड़ रुपये अधिक है।
अध्यक्ष महोदय, वित्तीय वर्ष 2018-19 में निम्नलिखित पांच बिन्दुओं पर विशेष फोकस केन्द्रित रहेगा ।
 
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आय को दोगुणा करना ।

रोजगार एवं स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर पैदा करना।

अनुसूचित जनजाति/जाति एवं अभिवंचित वर्गों का विकास।
महिला सशक्तिकरण।

पिछड़े जिलों/प्रखण्डों का समेकित विकास।

इसके साथ ही, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण तथा आधारभूत संरचना यथा- पेयजलापूर्ति, नगरीय विकास, गाँव को सड़क से जोड़ना तथा प्रत्येक घर में विद्युत आपूर्ति पहुँचाने पर भी केन्द्रित रहेगा।
 
योजनाओं में गतिशीलता लाने के उद्देश्य से छोटी-छोटी योजनाओं को Umbrella स्कीम में समाहित किया गया है। इससे जहां एक ओर बजट शीर्षों की संख्या कम होगी, वहीं दूसरी ओर विभागों को योजना कार्यान्वयन में ज्यादा Flexibility रहेगी ।

राज्य की लगभग 76 प्रतिशत जनता गांवों में रहती है, जो कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों पर ही आर्थिक रूप से आश्रित है। राज्य की इस ग्रामीण जनता की आय 3 वर्षों में दोगुनी करने लक्ष्य रखा गया है। कृषि, पशुपालन, सहकारिता, गव्य, मत्स्य, लाह, तसर, मुर्गी पालन, अण्डा उत्पादन, हस्तशिल्प, ऊर्जा एवं सिंचाई प्रक्षेत्रों को समेकित रूप से अभिषरित करते हुए पहली बार वर्ष 2016-17 में अलग से कृषि बजट की परिकल्पना की गई थी। इसी क्रम में वर्ष 2017-18 में भी कृषि बजट 5,375.22 करोड़ रूपये का सदन में प्रस्तुत किया गया था।

आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रस्तावित कृषि बजट 5,807.64 करोड़ रूपये है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.04 प्रतिशत अधिक है। आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 का कृषि बजट सदन में संदर्भित मांग पर चर्चा के दिन प्रस्तुत किया जायेगा।

राज्य की आधी आबादी महिलाओं की है और झारखण्ड की महिलाओं की कार्य क्षमता पर हम सबको नाज है। हमारी सरकार ने राज्य की महिलाओं के विकास, विशेष रूप से सखी मण्डलों को सशक्त और जीवन्त संस्था के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इन सखी मण्डलों के माध्यम से उत्पादित की जा रही सामग्रियों जैसे – अण्डा, सब्जी, दूध, चादर, तौलिया, स्कूली गणवेश, हस्तशिल्प, तसर एवं लाह आधारित उत्पादों को स्केल-अप करके उनका विपणन स्थानीय बाजार तथा राज्य के स्कूलों, अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों एवं बाजारों में सुनिश्चित किया जायेगा। इससे इन सखी मण्डल के सदस्यों के आय में वृद्धि हो सकेगी। महिलाओं के कल्याणार्थ राज्य में महिला आधारित कार्यक्रमों को समेकित करते हुए वित्तीय वर्ष 2017-18 में Gender Budget कुल 7,684.51 करोड़ रुपये का तैयार किया गया था। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए Gender Budget के रूप में 8,194.59 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष की तुलना में 6.64 प्रतिशत अधिक है। महिला एवं बाल विकास विभाग के मांगों पर विस्तृत चर्चा के दिन इसे सदन के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया जायेगा।

झारखण्ड राज्य में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों की संख्या काफी है और इनके विकास के लिए अलग से रणनीति विकसित किए जाने की आवश्यकता है। राज्य सरकार इन्हें विकास की मुख्य धारा से जोड़ने हेतु कृत संकल्प है। इस वर्ष हमने जनजातीय विकास क्षेत्रों एवं अनुसूचित जातियों के विकास पर विशेष बल दिया है और इस प्रक्षेत्र पर किए जाने वाले बजटीय प्रावधानों को अलग से संकलित करके अनुसूचित जनजाति क्षेत्र तथा अनुसूचित जाति विकास बजट इस सदन में अलग से प्रस्तुत किया जायेगा। वित्तीय वर्ष 2017-18 में अनुसूचित जनजाति क्षेत्र तथा अनुसूचित जाति विकास बजट का कुल आकार 22,259 करोड़ रूपये था, जो स्कीमों के लिए निर्धारित कुल बजटीय का 51.5 प्रतिशत था। आगामी वित्तीय वर्ष हेतु अनुसूचित जनजाति क्षेत्र तथा अनुसूचित जाति विकास बजट का कुल आकार 24,410 करोड़ रूपये है, जो स्कीमों के लिए निर्धारित कुल बजट का 52.49 प्रतिशत है। इस तरह इन वर्गों के लिए किए जा रहे विकास की गति को और भी तीव्रता प्रदान की जायेगी।

महोदय, आपके सहयोग से विकास की रथयात्रा को और आगे बढ़ाने के लिए मैं वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट में विभिन्न प्रक्षेत्रों में सरकार द्वारा तैयार किये गये महत्वपूर्ण प्रस्तावों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करना चाहता हूं।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आय को दोगुना करना
झारखण्ड किसानों एवं गाँवों का राज्य है, लेकिन क्या हम उनकी सूरत बदल पाये हैं ? किसानों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन को बदलना हमारा सामूहिक दायित्व होना चाहिये।  

राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की नींव को मजबूती प्रदान करने में पूरी तनमयता से जुटी हुई है। इसी उद्देश्य से राज्य स्थापना दिवस पर 1,500 करोड़ रुपये की जोहार परियोजना का शुभारंभ किया गया है। इस योजना का लक्ष्य दो लाख ग्रामीण परिवारों की कृषि एवं गैर-कृषि आजीविका संबंधी गतिविधियों समेत उत्पादों में विविधता एवं उत्पादकता बढ़ाते हुए उनकी आय को दोगुना करना है। इसके अन्तर्गत ग्रामीण परिवारों को उन्नत कृषि, मछली पालन, पशुपालन, सिंचाई के साधन, कौशल विकास से जोड़कर उनकी आजीविका को सशक्त बनाते हुए आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इस परियोजना में अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति के परिवारों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है, वहीं दूसरी ओर 50 फीसदी से अधिक महिला किसानों को भी लाभ मिलेगा।

महोदय, कृषि उत्पादों का विपणन हेतु कृषकों द्वारा उत्पादित सब्जी, फल एवं फूल के बाजार तक जाने के पूर्व उनके भण्डारण के लिए राज्य में सुव्यवस्थित कोल्ड चेन आवश्यक है। इस उद्देश्य से कोल्ड स्टोरेज के अलावा, राज्य में 100 छोटे कोल्ड रूम बनाये जाने का प्रस्ताव है, ताकि इन उत्पादों का सुसंगत भण्डारण हो सके।

कोल्ड चेन के साथ-साथ उपयुक्त जगहों की पहचान करके ऐसे जगहों पर जहाँ फलों और सब्जियों का उत्पादन पर्याप्त मात्रा में होता है, वहां Food Processing Units स्थापित किये जाने का प्रस्ताव है, ताकि कृषि उत्पाद में Value Addition करके किसानों को उचित मूल्य दिलाया जा सके।

दीनदयाल ग्राम स्वावलम्बन योजना के माध्यम से विभिन्न चरणों में राज्य के प्रत्येक पंचायत में एक मुख्यमंत्री ग्रामीण विकास फैलो का पदस्थापन किया जायेगा, जिसका दायित्व ग्राम पंचायत के अधीन आनेवाले प्रत्येक राजस्व ग्राम/टोले के ग्रामीणों को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जनसंख्या नियंत्रण, स्वच्छता, वैज्ञानिक चिन्तन, संगठन के महत्व, नशाबंदी, कुल्हारीबंदी, चराइबंदी, श्रमदान, बाल श्रम उन्मूलन, बाल विवाह उन्मूलन, जलछाजन, जैविक खेती योग्य व आध्यात्मिक जीवन शैली के माध्यम से संबंधित विषयों पर जागरूक करना होगा। इस योजना का क्रियान्वयन झारखण्ड स्वावलम्बन सोसाईटी के माध्यम से किया जायेगा। नीति आयोग द्वारा चयनित राज्य के 19 पिछड़े जिले जिनके समग्र विकास हेतु माननीय प्रधानमंत्री प्रयासशील हैं, इस योजना में प्राथमिकता के आधार पर लिए जायेंगे।

उत्पादित एवं भण्डारित कृषि उत्पादों को निकटतम बाजार/कोल्ड स्टोर/कोल्ड रूम तक सुगमता से पहुँचाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे पुल-पुलिया एवं पथों के निर्माण का प्रस्ताव है, ताकि उत्पादों के परिवहन में सुगमता बनी रहे।

कृषि विभाग द्वारा हजारों एकड़ भूमि पर बीज ग्राम तैयार किए गए हैं, जिनसे राज्य में ही बीज का उत्पादन पर्याप्त मात्रा में प्रारंभ हुआ है। ऐसे स्थलों पर आवश्यकतानुसार बीज प्रसंस्करण इकाईयों की स्थापना की जायेगी, जहां इन बीजों को प्रसंस्कृत करके इनके प्रमाणीकरण की व्यवस्था होगी।
 
बायो गैस प्लांट की स्थापना किए जाने का प्रस्ताव है, ताकि किसानों को मुफ्त ईधन मिलने के साथ-साथ जैविक खाद का भी उत्पादन हो सके।

किसानों के लिये सिंचाई की समुचित व्यवस्था हेतु अलग से बिजली फीडर लाईन क व्यवस्था की जायेगी तथा आवश्यकतानुसार सौर ऊर्जा की व्यवस्था की जायेगी।

किसानों एवं खेतीहर मजदूरों की सुरक्षा हेतु किसानों एवं खेतीहर मजदूरों के असामयिक मृत्यु पर उनकी सहायता सरकार करेगी। इसी उद्देश्य से सांप काटने, कुआँ धसने जैसी आकस्मिक आपदा राहत के लिए पीड़ित परिवारों को सरकार के द्वारा चार लाख रुपये की सहायता राशि दी जायेगी।

देवघर, रांची, सिमडेगा एवं निकटवर्त्ती क्षेत्रों में फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए नई योजनायें चलाये जाने का प्रस्ताव है।
योजना बनाओ अभियान के फलस्वरूप योजनाओं का चयन ग्रामीणों द्वारा किया जाने लगा है। इन छोटी-छोटी योजनाओं के निर्माण की जवाबदेही भी ग्राम विकास समिति/आदिवासी विकास समिति को ही सौंपे जाने की व्यवस्था की जायेगी।

राज्य में मछली उत्पादन में हमने आत्मनिर्भरता प्राप्त की है। अब राज्य में बाहर से मछली आयात की आवश्यकता नहीं रही है। साथ ही राज्य से मछली का निर्यात भी किया जाने लगा है। इसी तरह ‘‘मेधा दूध’’ को भी हम सशक्त करना चाहते हैं, इसके लिए NDDB के साथ एमओयू करने के उपरांत एक महत्ती कार्य योजना के तहत रांची में एक लाख लीटर तथा देवघर, पलामू, साहेबगंज, गिरिडीह एवं जमशेदपुर में 50 हजार लीटर क्षमता के डेयरी प्लांट का निर्माण आरंभ कराया जायेगा।

गोड्डा में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना संबंधित विधेयक सदन के समक्ष शीघ्र प्रस्तुत किया जायेगा तथा वित्तीय वर्ष 2018-19 में साहेबगंज में कृषि महाविद्यालय स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है।
महोदय, राज्य को कुपोषण मुक्त करने के लिए अगले वित्तीय वर्ष से सभी माननीय विधायकों के सहयोग से Gift Milk Scheme को राज्य के अन्य जिलों में चरणबद्ध तरीके से प्रारम्भ किये जाने का प्रस्ताव है, जिसके तहत कुपोषण से पीड़ित बच्चों को प्रतिदिन मुफ्त में दूध उपलब्ध कराया जायेगा।

अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायकगण अपनी निधि से स्ट्रीट लाईट का अधिष्ठापन भी करवा सकेंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों विशेषकर, बच्चों के लिये पंचायत स्तर पर चरणबद्ध तरीके से छोटे-छोटे पार्कों का निर्माण कराया जायेगा।

रोजगार एवं स्वरोजगार के अधिक-से-अधिक अवसर पैदा करना
महोदय, हमारी सरकार ‘‘स्कैम झारखण्ड’’ को ‘‘स्किल झारखण्ड’’ बनाने हेतु कृत संकल्प है। युवाओं को शिक्षा के साथ स्किल डेवलपमेंट पर फोकस कर उन्हें रोजगार मुहैय्या कराना मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जिन्दगी का गुजारा करने के लिए हाथ में सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि हुनर भी होना चाहिये। श्रमेव ज्यते हमारा मंत्र होना चाहिये। आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य में कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव है।

युवाओं में हुनर को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास मिशन के माध्यम से तीन लाख युवाओं को प्रशिक्षित करके उन्हें रोजगार उपलब्ध कराये जाने का लक्ष्य रखा गया है।

पिछले तीन वर्षों में एक लाख लोगों को सरकारी रोजगार दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में 50 हजार और सरकारी नियुक्तियां की जायेंगी।

मोमेन्टम झारखण्ड के बाद निजी कंपनियों से हुए एमओयू तथा 210 से अधिक कंपनियों के द्वारा ग्राउण्ड बेक्रिंग किए जाने के कारण इन नये उद्योगों के माध्यम से 50 हजार प्रत्यक्ष रोजगार तथा 1.50 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित किया जायेगा।
पिछले तीन वर्षों में पांच नये विश्वविद्यालय खोले जा चुके है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में विनोद बिहारी महतो विश्वविद्यालय, रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय तथा नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय के परिसर निर्माण हेतु कार्रवाई की जायेगी।

विश्वविद्यालय से दूरस्थ स्थित जिला मुख्यालयों में चरणबद्ध तरीके से PG की पढ़ाई प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है।

युवाओं को सक्षम बनाने के लिए सभी जिलों में एक-एक मेगा स्किल सेन्टर की स्थापना किए जाने पर कार्य किया जा रहा है।

गुणवतापूर्ण शिक्षा एवं शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय/महाविद्यालयों तथा डॉ० रामदयाल मुण्डा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान में शोध निधि की स्थापना का प्रस्ताव है।
जिन महाविद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशाला नहीं है, उनमें विज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना का प्रस्ताव है।

बड़े जिला मुख्यालयों में Library-Cum- Motivation Centre की स्थापना किये जाने का प्रस्ताव है।

विश्वविद्यालय स्तर पर Startup कोषांग की स्थापना की जायेगी, ताकि इच्छुक विद्यार्थियों को रोजगार प्राप्त करने में तत्काल सहायता प्राप्त हो सके।
राज्य में खेल विश्वविद्यालय अधिनियमित कर दिया गया है, जिसके गठन के उपरान्त राज्य में खेल/खेल विज्ञान/खेल शिक्षा तथा खिलाड़ियों का समुचित संवर्द्धन एवं विकास हो सकेगा।

अध्यक्ष महोदय, शिक्षा एवं कौशल विकास के साथ ही राज्य में मीठी क्रान्ति लाने हेतु मधुमक्खी पालन को वृहद् पैमाने पर प्रोत्साहित करने की योजना है। इसके तहत मुख्यमंत्री लघु कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के माध्यम से 25,000 किसानों को प्रशिक्षित कर इससे जोड़ा जायेगा। साथ ही, उत्पादित मधु के प्रोसेसिंग, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग की भी व्यवस्था की जा रही है। झारखण्ड में लाह की खेती को बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को इसका समुचित मूल्य दिलाने हेतु प्रोसेसिंग इकाई की स्थापना करने की योजना है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में 100 लाह परिसंस्करण इकाई की स्थापना की जाएगी तथा इससे उत्पादित सीड लाह एवं बटन लाह की देश-विदेश में बिक्री की व्यवस्था की जायेगी।

राज्य में रेशम का उत्पादन तीव्र गति से बढ़ा है। इन उत्पादित वस्तुओं को सुसंगठित बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दुमका प्रमंडल में रेशम प्रसंस्करण इकाई की स्थापना किए जाने का प्रस्ताव है।

रांची, देवघर, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर तथा रजरप्पा में हस्तशिल्प इम्पोरियम की स्थापना की जायेगी ।

रांची तथा खरसावां में PPP Mode में सिल्क पार्क की स्थापना की जायेगी।
सखी मण्डलों को सशक्त करते हुए महिला लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के माध्यम से 4.50 लाख महिलाओं को स्वावलम्बन के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराये जाने की कार्य योजना तैयार की गई है।

पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावना है। पतरातू को वृहद् पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने हेतु कार्य प्रगति पर है तथा पूर्ण होने के पश्चात् यह राज्य का वृहद् पर्यटक स्थल बनेगा।

देवघर, बासुकीनाथ, ईटखोरी, रजरप्पा, मसानजोर, चांडिल, दलमा, अंजनधाम, लुगुबुरू के पर्यटकीय विकास के लिए वृहद् कार्य योजना पर कार्य प्रारम्भ किया जायेगा। लुगुबुरू को राजकीय महोत्सव का दर्जा दिया जायेगा। सरायकेला जिले के छऊ महोत्सव को भी राजकीय महोत्सव का दर्जा दिया जाना प्रस्तावित है।

प्रसाद योजनान्तर्गत देवघर का विकास, स्वदेश दर्शन योजनान्तर्गत जमशेदपुर-राँची-नेतरहाट-बेतला ईको टूरिज्म सर्किट का विकास तथा चांडिल, गेतलसूद, नेतरहाट तथा बेतला का पर्यटन की दृष्टि से विकास किया जायेगा।

कौलेश्वरी, ईटखोरी तथा रजरप्पा को वृहद् गंतव्य के रूप में विकसित किया जायेगा तथा कौलेश्वरी में PPP Mode के आधार पर रोपवे अधिष्ठापित किया जायेगा।

मुख्यमंत्री वृद्धजन तीर्थ दर्शन योजना पूर्ववत् जारी रहेगी।
चरणबद्ध तरीके से प्रखण्ड मुख्यालय, पर्यटन स्थलों तथा 5 शहरों में ‘‘लघु कुटीर उद्योग हाट’’ की स्थापना किया जाना प्रस्तावित है, जहां लघु कुटीर उद्योग से निर्मित वस्तुओं की बिक्री हो सकेगी।

अनुसूचित जनजाति/जाति एवं अभिवंचित वर्गों का विकास
अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों एवं अन्य अभिवंचित वर्गों के लिए बजट प्रावधान का 50 प्रतिशत से अधिक (52 प्रतिशत) राशि रखी गई है।
 
अनुसूचित जनजाति/जाति का अलग बजट प्रासंगिक मांग पर बहस के दिन अलग पुस्तिका में प्रस्तुत किया जायेगा।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में अनुसूचित जनजाति बाहुल गांवों में आदिवासी विकास समिति के माध्यम से छोटे-छोटे चेक डैम, तालाब, जल संचयन संरचनाएँ आदि योजनाओं का निर्माण कराया जायेगा।  

आदिवासी क्षेत्रों में Old Age Home की स्थापना भी करने का प्रस्ताव है ।
 
अल्पसंख्यक बच्चों के लिए शिक्षा एवं हुनर का कार्यक्रम चलाया जायेगा ।
   
संथालपरगना प्रमण्डल के साहेबगंज, दुमका, गोड्डा एवं पाकुड़ जिले में 5,000 आदिम जनजाति परिवारों को गरीबी रेखा से उपर लाने का लक्ष्य रखा गया है।
कुपोषण को कम करने हेतु JTELP के परियोजनान्तर्गत 400 गांवों में 48,000 पोषण गार्डेन का निर्माण कराया जायेगा।

अनुसूचित जनजाति/जाति के डॉक्टर अगर जनजातीय क्षेत्र में अस्पताल का निर्माण करते हैं तो उन्हें 50 लाख रुपये तक बैंक से ऋण उपलब्ध कराये जाने की योजना प्रारंभ की जायेगी।

महोदय, स्वतंत्रता संग्राम में टाना भगतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं। टाना भगतों को मुख्य धारा में लाने एवं इनके सर्वांगीण विकास हेतु टाना भगत विकास प्राधिकार का गठन किया गया है। इनकी भूमि को लगान मुक्त करने का भी प्रस्ताव है।

अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में घंटी आधारित स्थानीय शिक्षक/सेवानिवृत शिक्षकों की सेवा ली जायेगी।

कब्रिस्तान की घेराबंदी के साथ-साथ सरना-मसना स्थलां की घेराबंदी का कार्य भी चरणबद्ध रूप से पूरा कराया जायेगा।

नगरीय क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मुक्तिधामों (श्मशान घाटों) को अधिक सुविधायुक्त बनाये जाने का प्रस्ताव है।

दिव्यांग जनों को विपरीत परिस्थितियों में विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने हेतु राज्य दिव्यांग कल्याण कोष की स्थापना की जायेगी।

एक लाख सखी मंडलों की संख्या को बढ़ाकर 1.50 लाख करने की योजना है। इन्हीं सखी मण्डलों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराते हुए स्वावलम्बी बनाये जाने का महती कार्यक्रम तैयार किया गया है। इन मंडलों द्वारा निम्न कार्य कराये जायेंगे।
पूरक पोषाहार
सैनिटरी नैपकिन का निर्माण
School Dress आदि की सिलाई

जमशेदपुर महिला कॉलेज को विश्वविद्यालय के रूप में उत्क्रमित किया जायेगा, ताकि उस क्षेत्र की बालिकाओं को स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा का लाभ प्राप्त हो सके।

उच्च शिक्षा में बालिकाओं के आवासन की समस्या को ध्यान में रखते हुए महिला महाविद्यालयों के पास चरणबद्ध तरीके से 300 शैय्या वाले महिला छात्रावासों का निर्माण कराया जायेगा।

सभी कस्तूरबा विद्यालयों के लिए चहारदिवारी का निर्माण कराया जाना भी प्रस्तावित है।

सामूहिक सहभागिता के माध्यम से महिला सशक्तिकरण हेतु संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य के 20 चिन्हित जिलों में महिला शक्ति केन्द्रों की स्थापना की जायेगी।

उच्च शिक्षा में बालिकाओं के आवासन की कठिनाई को देखते हुए महिला महाविद्यालयों के पास महिला छात्रावासों का निर्माण किए जाने का प्रस्ताव है।

दहेज रहित विवाह को बढ़ावा देने हेतु सामूहिक विवाह कार्यक्रमों के आयोजकों को 1,000 रुपये प्रति विवाह प्रोत्साहन राशि प्रदान की जायेगी।

लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराने वाली संस्थाओं को करती है, उन्हें भी सहायता राशि प्रदान की जायेगी।

महिलाओं को पचास लाख रुपये के विक्रय पत्र के निबंधन पर मुद्रांक एवं निबंधन शुल्क से पूर्ण छूट दी गई है तथा मात्र एक रुपया की टोकन राशि मुद्रांक शुल्क के रूप में लेकर निबंधन किया जा रहा है, जिसे आगामी वित्तीय वर्ष में भी जारी रखा जायेगा।

नीति आयोग के द्वारा देश के 115 जिलों को अति पिछड़े जिले के रूप में पहचान किया गया है, इसमें झारखण्ड के 19 जिले शामिल हैं। इन 19 जिलों में से 16 जिले LWE हैं, जिनके लिए केन्द्र सरकार ने प्रति जिला 28.57 करोड़ रुपये की राशि देने की योजना तैयार की है, ताकि इन 16 पिछड़ों जिलों का योजनाबद्ध तरीके से समेकित विकास किया जा सके।

नीति आयोग ने कुपोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आधारभूत संरचना के मानकों के आधार पर अन्य 6 जिलों को अति पिछड़ा घोषित किया गया है। इन जिलों के योजनाबद्ध विकास के लिए प्रति जिला 50 करोड़ रुपये की राशि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी, ताकि इनका त्वरित विकास सुनिश्चित किया जा सके। इस विकास राशि से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, विधि-व्यवस्था तथा Missing Link योजनायें ली जायेंगी।

गत तीन वर्षों में रेलवे के क्षेत्र में अच्छी प्रगति हुई है। देवघर-दुमका (60 किमी.), दुमका-रामपुर हाट (64 किमी.), रांची-लोहरदगा-टोरी (113  किमी.) पर रेल परिचालन प्रारंभ कर दिया गया है।
 
रांची-बरकाकाना, हजारीबाग-कोडरमा (203 किमी.) में से कोडरमा- हजारीबाग-बरकाकाना (137 किमी.) अंश पर रेल परिचालन प्रारंभ हो गया है। अवशेष बचे बरकाकाना-राँची (63.34 किमी.) अंश पर भी रेल सेवा वित्तीय वर्ष 2018-19 के अंत तक परिचालित करा देने का लक्ष्य रखा गया है।

इसी तरह कोडरमा-गिरिडीह (111 किमी.) में से कोडरमा-नावाडीह-कावर (88 किमी.) अंश पर रेल सेवा प्रारंभ कर दी गई है। अवशेष बचे कॉवर-गिरिडीह (23 किमी.) अंश पर भी रेल सेवा वित्तीय वर्ष 2018-19 में तक परिचालित कराने का लक्ष्य रखा गया है।  
महोदय, कोडरमा-तिलैया (14 किमी.) तथा गोड्डा-हसंडीहा  (32.46 किमी.) के निर्माण पर भी रेलवे मंत्रालय की सहमति प्राप्त हो चुकी है और प्रारंभिक सर्वे कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में इन योजनाओं का निर्माण कार्य प्रारम्भ कराये जाने का लक्ष्य है।
बिरसा मुण्डा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए 301 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर इसे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को हस्तान्तरित किया जा चुका है।

देवघर हवाई अड्डे के लिए भी 653.75 एकड़ भूमि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को उपलब्ध करा दी गई है। इसके अतिरिक्त हजारीबाग, पलामू (चियांकी) तथा दुमका हवाई अड्डा के रनवे के विस्तार हेतु भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई प्रारंभ की गई है।

पथ प्रक्षेत्र में पथों का घनत्व 122.33 किमी. प्रति हजार वर्ग किमी. से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2016-17 की समाप्ति तक 132.59 किमी. प्रति हजार वर्ग कि०मी० हो गया है। वर्ष 2017-18 में 963 किमी. पथों के निर्माण से पथ घनत्व बढ़कर 145 किमी. प्रति हजार वर्ग किमी. हो गया है। इसका सीधा असर उत्पादकता, मजदूरी दर, गरीबी उन्मूलन दर, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य सेवाओं की डिलेवरी पर होगा।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में अन्तर्राज्यीय महत्व, पर्यटन के महत्व, औद्योगिक विकास के महत्व, अन्तरजिला एवं जिले के महत्वपूर्ण पथों के विकास का लक्ष्य है। लगभग 1,200 किमी. पथों एवं 30 वृहद पुलों के निर्माण का कार्यक्रम है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत 6,000 किमी. पथ निर्माण का लक्ष्य है। इस निर्माण से 2,400 बसावटों को जोड़ने का प्रस्ताव है।

राज्य सम्पोषित योजनान्तर्गत गांवों को सम्पर्कता प्रदान करने हेतु 2,000 किमी. ग्रामीण पथ निर्माण कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजनान्तर्गत 125 पुलों का निर्माण कार्य कराया जायेगा। इन सभी पुलों के निर्माण से राज्य के दूरवर्ती क्षेत्र जो नदियों के प्रवाह से आवागमन की सुविधा से वंचित हैं, में आवागमन सुचारू रूप से चालू हो सकेगा। फलस्वरूप क्षेत्र के लोगों का सामाजिक तथा आर्थिक विकास हो सकेगा।

राज्य के 1,000 सरकारी भवनों में ग्रिड कनेक्टेड रूफ टॉप सोलर पावर प्लांट अधिष्ठापन किया जायेगा।

राज्य में सिंचाई कार्य हेतु 2,000 अदद् सोलर पम्प का अधिष्ठापन किया जायेगा।

रांची जिलान्तर्गत अनगड़ा प्रखण्ड में सिकदिरी नहर पर 2 मेगावाट क्षमता के कैनाल टॉप सोलर पावर प्लांट अधिष्ठापित किया जायेगा।
राष्ट्रीय बायो गैस के अन्तर्गत अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ अन्य व्यक्तियों को भी लाभान्वित किया जायेगा।

प्रधानमंत्री ‘‘सौभाग्य’’ योजना की स्वीकृति दी गई है। इस योजना के अन्तर्गत छूटे हुए अविद्युतीकृत आवासों को विद्युतीकृत करने हेतु गाँवों में लास्ट माईल आधारभूत संरचना का विकास करते हुए सभी आवासों को विद्युतीकृत किया जाना है। इस योजनान्तर्गत 17.64 लाख ग्रामीण आवास तथा 8.64 लाख शहरी आवास आच्छादित किए जायेंगे।

शहरी आवास योजना के अन्तर्गत 25,000 आवासों का निर्माण का कार्य पूर्ण करा लिया गया है, जिसमें 2 अक्टूबर, 2017 को गृह प्रवेश किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तीसरे घटक ‘‘भागीदारी एवं किफायती आवास’’ के अन्तर्गत 40,000 आवासों के निर्माण का कार्य आगामी वित्तीय वर्ष में पूर्ण किया जायेगा।

27 नगर निकायों में एक-एक दादा-दादी पार्क का निर्माण भी प्रस्तावित है।

धनबाद, देवघर, जमशेदपुर एवं रांची में इन्टर स्टेट बस टर्मिनल तथा ट्रान्सपोर्ट नगर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।

मोरहाबादी मैदान, रांची के विकास एवं सौन्दर्यीकरण का प्रस्ताव है।
शहरी क्षेत्र में वार्ड विकास केन्द्र खोले जाने का प्रस्ताव है।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में बासुकीनाथ, धनबाद एवं रामगढ़ में अरबन हाट का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है।

आर्थिक रूप से कमजोर एवं अल्प आय वर्ग के लिये निर्मित किफायती आवास के निबंधन पर मात्र एक रुपया कर राशि मुद्रांक एवं निबंधन शुल्क के रूप में ली जायेगी।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में पाईप जलापूर्ति योजना से ग्रामीण आबादी का 40 प्रतिशत आच्छादन किया जायेगा।

सभी आदिम जनजाति टोलों में पाईप जलापूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी।

MBMG अन्तर्गत पूरे राज्य को वित्तीय वर्ष 2018-19 में खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जायेगा।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में फ्लोराईड एवं आर्सेनिक प्रभावित टोलों का शत प्रतिशत शुद्ध पेयजल से आच्छादित किया जायेगा।

6 अति पिछड़े जिलों में प्राथमिकता के आधार पर पेयजलापूर्त्ति योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा सकेगा।

लघु सिंचाई अन्तर्गत 500 चेकडैम एवं 300 वियर योजना का निर्माण वर्ष 2018-19 में कराये जाने का प्रस्ताव है।
300 पुरानी मध्यम सिंचाई योजना एवं आहर/तालाब के पुनर्स्थापन का कार्य भी कराये जाने का प्रस्ताव है।

326 चेकडैम योजना का कार्य पूर्ण कराते हुए 20,363 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता सृजित किया जाना प्रस्तावित है।

22 पूर्ण मध्यम सिंचाई योजनाओं के आधुनिकीकरण/नहर लाईनिंग का कार्य कराया जाना वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रस्तावित है।

शिक्षा के गुणवता हेतु झारखण्ड शैक्षणिक शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान को प्रभावकारी बनाते हुए राज्य के प्रशिक्षण संस्थानों को सुदृढ़ किया जायेगा।

राज्य के 8 अनुमण्डलीय पुस्तकालयों को जिलास्तरीय पुस्तकालय में उन्नयन तथा सभी जिलास्तरीय पुस्तकालयों में आगामी 3 वर्षो में मोटीवेशनल केन्द्र तथा ई-लाईब्रेरी की स्थापना किया जाना प्रस्तावित है।  

300 या अधिक नामांकित सभी 10+2 विद्यालयों, जहां नामांकन क्षमता 500 या उससे अधिक है, में कम्प्यूटर शिक्षा तथा स्मार्ट क्लास की व्यवस्था मुख्यमंत्री उच्च माध्यमिक शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत किये जाने का प्रस्ताव है।
89 मॉडल विद्यालयों को CBSE की तर्ज पर इंग्लिश मीडियम शैक्षणिक संस्था के रूप में पूर्णरूपेण विकसित किये जाने का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए प्रस्तावित है।

सभी प्रखण्ड मुख्यालयों के एक विद्यालय में योग शिक्षा की शुरुआत किया जाना प्रस्तावित है।

भारत सरकार से समन्वय स्थापित कर खूंटी एवं रामगढ़ जिले में अगले शैक्षिक सत्र से नवोदय विद्यालय की स्थापना तथा पलामू जिले में केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना किये जाने का प्रस्ताव है।

विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण तथा पुनर्गठन कर संकाय एवं विषयवार शिक्षक की समुचित व्यवस्था किया जाना लक्षित है।

नक्सल गतिविधि से प्रभावित परिवार के बच्चों के लिये चार आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था किये जाने का प्रस्ताव है।

अवैध पलायन से मुक्त करायी गई बालिकाओं हेतु दो आवासीय विद्यालय की समुचित व्यवस्था की जायेगी।

स्थापित किये गये दो बी.एड. कॉलेज-हाट गम्हारिया एवं रेहला को वित्तीय वर्ष 2018-19 में कार्यशील बनाया जाना प्रस्तावित है।
 
आवासीय माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने के लिए इनमें व्यावसायिक पाठ्यक्रम चलाये जाने का प्रस्ताव है।

केन्द्र प्रायोजित योजना (60:40) के अन्तर्गत स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम (एस.आई.एस.) के तहत झारखण्ड जगुआर का उन्नयन एवं सुदृढ़िकरण कुल-77 फोर्टिफाईड पुलिस थानों के निर्माण तथा उग्रवाद-निरोध के बिन्दु पर विशेष आसूचना ब्यूरो (एस.आई.बी.) के गठन, उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण की योजना है।  

राज्य आपदा मोचन बल का गठन झारखण्ड सशस्त्र बल से आवश्यकतानुसार नवनियुक्त बल एवं प्रतिनियुक्ति के आधार पर अन्य बलों से लेकर किया जायेगा।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में अन्य 6 शहरों, यथा-धनबाद, बोकारो, रामगढ़, जमशेदपुर, देवघर तथा दुमका में भी सी.सी.टी.वी प्रणाली लागू किये जाने की योजना है।

महोदय, सरकार राज्य के भूमिहीनों को गांव में खेती के लिए पांच एकड़ जमीन देगी। साथ ही, आवास निर्माण के लिए भी 12.5 डिसमिल जमीन दी जायेगी। शहीद सैनिकों, अर्द्ध सैनिक बलों एवं पुलिस कर्मियों के परिजनों को जीवन यापन के लिए गाँव में पाँच एकड़ जमीन दी जायेगी। इस निर्णय का लाभ लगभग दो लाख परिवारों को मिलेगा। पूर्वी पाकिस्तान और बर्मा से 1947 के विभाजन के बाद आए हुए शरणार्थियों के मामले में आवासीय प्रयोजन के लिए नियमितीकरण किया जा सकेगा।
महोदय, भ्रष्टाचार का रोग राज्य को कैंसर के समान खाये जा रहा था, यहाँ तक कि लोग स्कैम झारखण्ड कहने लगे थे। हमने इससे लड़ने का निर्णय लिया और तीन वर्ष में हमने बेदाग सरकार दी है। भ्रष्टाचार से लड़ने की हमारी नीति एवं नियत स्पष्ट है और हम स्कैम झारखण्ड नहीं अपितु स्किल झारखण्ड बना रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के क्षेत्रीय कार्यालय राज्य के सभी प्रमंडलों में खोले गये हैं तथा इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं। वर्ष 2014 में सिर्फ 31 लोक सेवक भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े गए थे, वहीं 2015 में 54, 2016 में 84 तथा 2017 में 138 लोक सेवक पकड़े जा चुके हैं।

महोदय, प्रेस एवं मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ हैं। सरकार द्वारा रांची में प्रेस क्लब बनाकर पत्रकारों को उपलब्ध कराया गया है तथा धनबाद में भी प्रेस क्लब की स्वीकृति दी गई है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में जमशेदपुर, चाईबासा, दुमका एवं देवघर में प्रेस भवन बनाये जायेंगे।

महोदय, राज्य में राजकोषीय अध्ययन संस्थान की स्थापना की जा चुकी है। इस संस्थान के माध्यम से राजस्व संग्रहण में वृद्धि के उपाय, तथा वित्तीय प्रबंधन एवं योजनाओं का परिणान्मोमुखी मूल्यांकन किया जायेगा।

अध्यक्ष महोदय, राज्य में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू हो गया है और राज्य सरकार का यह सतत् प्रयास है कि विभिन्न चेम्बर ऑफ कॉर्म्स एवं अन्य स्टेक होल्डर्स के माध्यम से जहाँ कर प्रणाली व्यवसायियों के लिये सुगम एवं पारदर्शी हो, वहीं दूसरी ओर व्यापार में Ease Of Doing Business को बढ़ाकर राज्य को आर्थिक प्रगति के मार्ग पर ले जाया जा सके।

अध्यक्ष महोदय, मुझे सदन को बताते हुए अति प्रसन्नता हो रही है कि राज्य के विकास पर व्यय में लगातार वृद्धि के बावजूद राज्य का सकल वित्तीय घाटा FRBM Act (राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम) में निर्धारित सीमा के अन्दर रहा है तथा आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट के अनुमानित व्यय भी अधिनियम के निर्धारित सीमा के अन्दर रहेंगे।

अध्यक्ष महोदय, यह लोकतंत्र का मंदिर है और हम सब यहां बैठकर पूरी पवित्रता के साथ पद के लिये नहीं, अपितु राज्य की सवा तीन करोड़ जनता के लिये, उनकी आकांक्षाओं एवं आशाओं को पूर्ण करने के लिये बैठे हैं।

अध्यक्ष महोदय, इन शब्दों के साथ मैं राजस्व व्यय के लिए  62,744.44 करोड़ रुपये तथा पूंजीगत व्यय के लिए 17,455.56 करोड़ रुपये, यानि कुल 80,200 करोड़ रुपये का बजट सदन में समर्पित कर रहा हूं।
जय झारखण्ड। जय हिन्द।